रफ़्तार

Posted: July 21, 2017 in A reason to Laugh out, Loud Echoes

lazy-day-fun

रुक जा हैं क्या हड़बड़ी,
जल्दी हैं क्या उमर हैं पड़ी,
आ बैठ ले घड़ी दो घड़ी,
तेज़ चलके क्या जीत लेंगे|

चुस्की सा ज़िन्दगी को पी,
यह चाय है गरम बड़ी,
आ बैठ ले घड़ी दो घड़ी,
तेज़ चलके क्या जीत लेंगे|

तेरी साँसे फ़ूल रही हैं,
फुर्सतों में हांफ भी ले,
कितना तूने पा के खोया,
फुर्सतों में नाप भी लें,
फुर्सते हसरतें,
हसरतें फुर्सते||

रुक जा हैं क्या हड़बड़ी,
जल्दी हैं क्या उमर हैं पड़ी,
आ बैठ ले घड़ी दो घड़ी,
तेज़ चलके क्या जीत लेंगे|

Cover Image via Tadst

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