गुरूर

Posted: July 12, 2017 in Lovelessness, Poems about Love
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Life wheel-attitude

सख्तियां बरत ज़रा सी,
इश्क़ बिगड़ने लगा हैं,
मखमली बातें ना कर जब,
इश्क़ लड़ने लगा हैं|

तेरे दर्द से जब बने,
किसी की मुस्कुराहटें,
किस हक़ से वो पाए भला,
तेरी रहमतें तेरी चाहतें,
ये जान ले वो दर्द हैं,
और तू खुद ही का मर्ज़ हैं,
ना बन किसी का इतना भी,
कि तू खुद का ना रहे|

सख्तियां बरत ज़रा सी,
इश्क़ बिगड़ने लगा हैं,
मखमली बातें ना कर जब,
इश्क़ लड़ने लगा हैं|

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Comments
  1. वाह बेहद उम्दा अभिव्यक्ति है दोस्त

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