Archive for June, 2017

ये दूर का इश्क़,
मुझे घूरता इश्क़.
ये हैं चुड़ैल सा,
पर हूर का इश्क़|

रूहों की ठंडक हैं कभी,
कभी ये जलता जलजला,
धुआं धुआं ये दिल को करे,
फिर तूफ़ां से दे बुझा,
बिन छुए ये चीर दे,
बची कुची सांसे मेरी,
टुकड़े टुकड़े मैं जियू,
सांस लगे फांसे मरी,
किसी ज़हरीले गुच्छे से टूटा,
ये ज़हरीले अंगूर सा इश्क़,
ये दूर का इश्क़,
मुझे घूरता इश्क़|